Home / Astrology / मोहिनी एकादशी व्रत 2022 | Mohini Ekadashi Vrat 2022
मोहिनी एकादशी व्रत 2022 | Mohini Ekadashi Vrat 2022
Astrology / By Dr. Deepak Sharma
मोहिनी एकादशी व्रत 2022 | Mohini Ekadashi Vrat 2022  मोहिनी एकादशी व्रत, वैशाख शुक्ल एकादशी तिथि, 12 मई 2022,  दिन गुरूवार को है यह पाप से मुक्ति दिलाता है। मोहिनी एकादशी व्रत प्रत्येक वर्ष वैशाख शुक्ल एकादशी तिथि को मनाया जाता है। जो व्यक्ति इस व्रत को करता है वह समस्त मोह बंधन से मुक्त हो जाता है।  वैशाख मास की यह एकादशी श्रेष्ठ मानी गयी है। यही नहीं इस व्रत को करने से जाने अनजाने में किये गए पापाचरण भी शीघ्र ही समाप्त हो जाता है। वस्तुतः मोहिनी एकादशी करने से मनुष्य सभी प्रकार के मोह बन्धनों से मुक्त हो जाता है साथ ही उसके द्वारा कृत्य पाप भी नष्ट हो जाता है परिणामस्वरूप वह मोक्ष को प्राप्त करता है।
मोहिनी एकादशी नाम का महत्त्व
मोहिनी एकादशी के विषय में कहा गया है कि समुद्र मंथन के बाद अमृत कलश पाने के लिए दानवों एवं देवताओं के मध्य जब विवाद हो गया तब  भगवान् विष्णु ने अति सुन्दर स्त्री का रूप धारण कर दानवों को मोहित कर दिए थे और अमृत कलश लेकर  देवताओं को सारा अमृत पीला दिया था और सभी देवता अमृत पीकर अमर हो गये। कहा जाता है कि जिस दिन भगवान विष्णु मोहिनी रूप धारण किये थे उस दिन वैशाख शुक्ल एकादशी तिथि थी इसी कारण भगवान विष्णु के इसी मोहिनी रूप की पूजा मोहिनी एकादशी के रूप में की जाती है। यही जो भक्त यह व्रत करता है वह अपने समस्त परेशानियों को मोहिनी रूप धारण कर समाधान करने का सामर्थ्य रखेगा।
मोहिनी एकादशी व्रत कथा | Story of  Mohini Ekadashi Vrat 
प्रचलित मोहिनी एकादशी व्रत कथा के अनुसार सरस्वती नदी के तट पर भद्रावती नाम की एक नगरी थी। वहां चन्द्रवंश में उत्पन धृतिमान नामक राजा राज करते थे। उसी नगर में धनपाल नाम का  एक वैश्य भी रहता था जो  धनधान्य से परिपूर्ण और सुखी जीवन यापन कर रहा था।  वह सदा पुन्यकर्म में ही लगा रहता था। भगवान विष्णु की भक्ति में लीन रहता था। उसके पाँच पुत्र थे। सुमना, द्युतिमान, मेधावी, सुकृत तथा धृष्ट्बुद्धि।
धृष्ट्बुद्धि पांचवा पुत्र था। वह अकृत्य काम ( जुआ, चोरी इत्यादि ) में लगा रहता था। वह वेश्याओं  के ऊपर अपने पिता का धन बरबाद किया करता था । एक दिन उसके पिता से यह सब सहन नहीं हो सका और परेशान होकर उसे उसे अपने घर से निकाल दिया इसके बाद इधर-उधर भटकने लगा। इसी क्रम में भूख-प्यास से व्याकुल वह महर्षि कौँन्डिन्य के आश्रम जा पहुँचा और वह मुनिवर कौँन्डिन्य के पास जाकर करबद्ध होकर बोला : भगवन मेरे ऊपर  दया करे मुझे कोई ऐसा मार्ग बताये जिससे मुझे मुक्ति मिल जाए।
कौँन्डिन्य ऋषि बोले –  वैशाख  मास के शुक्ल पक्ष में ‘मोहिनी’ नाम से प्रसिद्द एकादशी का व्रत करो। ‘मोहिनी’ एकादशी के दिन उपवास करने से प्राणियों के अनेक जन्मों के किए हुए मेरु महापाप भी नष्ट हो जाते हैं।’ मुनि का यह वचन सुनकर धृष्ट्बुद्धि का प्रसन्न हो गया और उन्होंने कौँन्डिन्य के उपदेश से विधिपूर्वक ‘मोहिनी एकादशी’ का व्रत किया और  इस व्रत के करने से उसके सभी पाप कर्म करना बंद कर दिया तथा भगवान विष्णु के आशीर्वाद से पाप मुक्त हो गया और स्वर्गलोक में प्रस्थान कर गया। इसलिए यह व्रत अत्यन्त श्रेष्ठ व्रत माना गया है इस व्रत को करने से व्यक्ति का कल्याण होता है।
मोहिनी एकादशी व्रत विधि | Method of  Mohini Ekadashi Vrat 
जो व्यक्ति मोहिनी एकादशी का व्रत करता है उसे एक दिन पहले अर्थात दशमी तिथि की रात्रि से ही व्रत के नियमों का पालन करना चाहिए। उस दिन शाम में सूर्यास्त के बाद भोजन नहीं करना चाहिए और रात्रि में भगवान का ध्यान करते हुए सोना चाहिए। व्रत के दिन सुबह सूर्योदय से पहले  उठकर नित्य क्रिया से निवृत्य होकर स्नान कर लेना चाहिए। यदि सम्बव हो तो गंगाजल को पानी में डालकर नहाना चाहिए।स्नान करने के लिए कुश और तिल के लेप का प्रयोग करना श्रेष्ठ माना गया है। स्नान करने के बाद साफ वस्त्र धारण कर विधिवत भगवान श्री विष्णु की पूजा करनी चाहिए।
भगवान् विष्णु की प्रतिमा के सामने घी का दीप जलाएं तथा पुनः व्रत का संकल्प ले, कलश की स्थापना कर लाल वस्त्र बांध कर कलश की पूजन करें। इसके बाद उसके ऊपर भगवान की प्रतिमा रखें, प्रतिमा को स्नानादि से शुद्ध करके नव वस्त्र पहनाए। उसके बाद पुनः धूप, दीप से आरती उतारनी चाहिए और नैवेध तथा फलों का भोग लगाना चाहिए। फिर प्रसाद का वितरण करे तथा ब्राह्मणों को भोजन तथा दान-दक्षिणा अवश्य देनी चाहिए। रात्रि में भगवान का भजन कीर्तन करना चाहिए। दूसरे दिन ब्राह्मण भोजन तथा दान के पश्चात ही भोजन ग्रहण करना अच्छा होता है।
एकादशी का व्रत शुद्ध मन से करना चाहिए। मन में किसी प्रकार का पाप विचार नहीं लाना चाहिए। झूठ तो अंजान में भी नहीं बोले तो अच्छा रहेगा।  रखने वाले को अपना मन साफ रखना चाहिए। व्रती को पूरे दिन निराहार रहना चाहिए तथा  शाम में पूजा के बाद फलाहार करना चाहिए।
Previous PostNext Post
Related Posts
How can Astrology help in Health, Eye and Heart Troubles
Astrology / By Dr. Deepak Sharma
How can Astrology help in Health, Eye and Heart Troubles. Astrology can help through strotra, mantra, gemstone etc.  In the  Valmiki  Ramayan  you  must  have read…
SURYA STUTI
Astrology / By Dr. Deepak Sharma
Surya  Stuti is very  powerful mantra it can recite by everyone. recitation of these 12 Strotra’s  Stuti is good for health, sound, age, knowledge, respect…
How Your 9 Planets give you Fortune
Astrology / By Dr. Deepak Sharma
How Your 9 Planets give you Fortune. Most of us know that nine planets (नवग्रह) are responsible for all the fortunes and misfortunes in our…
What is Mangalik Dosh
Astrology / By Dr. Deepak Sharma
What is Mangalik Dosh ? Affliction of  Mars in the horoscope known as a Mangalik dosh horoscope. It is caused by placement of Mars in…
1 thought on “मोहिनी एकादशी व्रत 2022 | Mohini Ekadashi Vrat 2022”
SUNIL PUNDORA
01/06/2017 AT 12:59 PM
My child is born 6 may 2017 8.40 am what is his future
Reply
Leave a Comment
Your email address will not be published. Required fields are marked *
         
Copyright © 2022Astroyantra | Powered by Cyphen Innovations