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Dhanteras 2022 | धनतेरस धनत्रयोदशी 2022 – Astroyantra
Astrology / By Dr. Deepak Sharma
Dhanteras 2022 | धनतेरस धनत्रयोदशी 2022 प्रत्येक वर्ष कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष त्रयोदशी के दिन धनतेरस पूजा मनाई जाती है । कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि के दिन समुद्र-मंथन के समय भगवान धन्वन्तरि अमृत कलश लेकर प्रकट हुए थे। इसी कारण इस तिथि को धनतेरस या धनत्रयोदशी के नाम से जाना जाता है। भगवान धन्वन्तरि चूंकि कलश लेकर प्रकट हुए थे इसी कारण इस अवसर पर बर्तन खरीदने की परंपरा वर्षों से चली आ रही है।
इस वर्ष धनतेरस 23 अक्टूबर को मनाया जाएगा। त्रयोदशी तिथि 22 को संध्या 06:03 बजे से प्रारम्भ हो रही है जो 23 अक्टूबर को शाम 6.04 बजे तक रहेगी। दिनांक 23 अक्टूबर को त्रयोदशी सूर्योदय काल और प्रदोषकाल दोनो समय में रहेगा इस कारण 23 तारीख को धनतेरस मनाई जाएगी जो की शास्त्र सम्मत है।
धनतेरस मुहूर्त  दिल्ली के लिए
इस दिन हम मुख्य रूप से कोई सामान खरीदकर अपने घर लेकर आते है सामान धन के प्रतीक रूप में होता है। यह पूजा दीपावाली से एक दिन पूर्व मनाई जाती है। आइये जानते हैं इस दिन पूजा तथा सामान खरीदने का शुभ मुहूर्त क्या है।  2022 की दीपावली पूजा 24 अक्टूबर
धनतेरस पूजा तथा सामान खरीदने का शुभ मुहूर्त 2022
क्या-क्या खरीद सकते हैं धनतेरस के दिन ?
  1. कुबेर यंत्र और महालक्ष्मी यंत्र ।
  2. लक्ष्मी-गणेश जी की मूर्ति ।
  3. सोने-चांदी के सिक्के खरीदना होता है शुभ ।
  4. धनिए के बीज ।
  5. दक्षिणवर्ती शंख ।
  6. कमलगट्टे की माला ।
  7. धार्मिक साहित्य या रुद्राक्ष की माला ।
  8. धनतेरस के दिन झाड़ू खरीदने से लक्ष्मी घर आती हैं। इससे नकारात्मक ऊर्जा घर से बाहर चली जाती है।
  9. इस दिन प्राणप्रतिष्ठित रसराज पारद श्री यंत्रम घर में लाना भी लाभकारी होता है।
  10. धनतेरस के दिन नमक खरीदने से भी घर में धन और सुख शांति आती है।
राशि के अनुसार भी धनतेरस की खरीदारी कर सकते हैं
मेष: सोना-चांदी की वस्तु, भूमि, इलेक्ट्रॉनिक गुड्स,।
वृषभ : चांदी, हीरा, जमीन-जायदाद, वाहन, इलेक्ट्रॉनिक गुड्स आदि
मिथुन : जमीन-जायदाद, सोना व चांदी, कुबेर यन्त्र।
कर्क: सोना-चांदी, भूमि की खरीद, झाड़ू।
सिंह : सोना, तांबा, शेयर बाजार में निवेश, लक्ष्मी यन्त्र।
कन्या : सोना व चांदी, इलेक्ट्रॉनिक्स गुड्स, जमीन-जायदाद
तुला : चांदी के सभी सामान खरीदना शुभ रहेगा।
वृश्चिक : सोना- चांदी, जमीन-जायदाद।
धनु : सोना का कोई भी सामान खरीदना अत्यंत शुभ होगा, इलेक्ट्रॉनिक्स गुड्स,
मकर : चांदी, इलेक्ट्रॉनिक्स गुड्स, स्टील के फर्नीचर।
कुंभ: सोना, चांदी, स्टील के फर्नीचर।
मीन : सोना का कोई भी सामान खरीदना अत्यंत शुभ होगा। चांदी के सिक्के तथा गणेश प्रतिमा खरीदना भी शुभ होगा।
स्वास्थ्य और धन्वंतरि देवी
धनत्रयोदशी का दिन प्रायः धनतेरस पूजा के नाम से जाना जाता है। वस्तुतः आयुर्वेद के देवता धन्वन्तरि का जन्म भी इसी दिन हुआ था इसलिए इस दिन धन्वन्तरी जयंती भी मनाई जाती है।  आयुर्वेद के द्वारा हम अपने शरीर को स्वस्थ्य रखते है वैदिक युग में स्वास्थ्य को सबसे बड़ा धन माना जाता था हालांकि आज भी यही सत्य है इसमें कोई संदेह नहीं है क्योकि हमारे समस्त धर्म का साधन हमारा शरीर ही है वेद में भी कहा भी गया है —
शरीरमेव खलु धर्म साधनम
इस दिन हनुमान जयंती और मासिक शिवरात्रि भी मनाई जाती है। इस कारण यह दिन अत्यंत ही शुभ दिन हो जाता है। इसी दिन रात में यम दीपक भी निकाला जाता है परिवार में किसी भी सदस्य की असमय मृत्यु न हो इसलिए “यम का दिया” निकाला जाता है। इस कारण यह और भी शुभ हो जाता है।
धनत्रयोदशी में धनतेरस पूजा करने के लिए चौघड़िया मुहूर्त को देखना जरूरी नही होता। धनतेरस पूजा के लिए सबसे अच्छा समय स्थिर लग्न तथा प्रदोष काल होता है। ऐसा कहा जाता है कि यदि  स्थिर लग्न के समय धनतेरस पूजा की जाये तो लक्ष्मीजी घर में आकर स्थिर हो जाती है। इसी कारण धनतेरस पूजा के लिए स्थिर लग्न को धन वृद्धिदायक माना जाता है। ज्योतिष में वृषभ लग्न  स्थिर होता है और दीवाली पर्व के समय यह लग्न अधिकांशतः प्रदोष काल में होता है।
कैसे करें धनतेरस के दिन पूजा ?
धनतेरस के दिन सर्वप्रथम विघ्नहर्ता गणपति की पूजा करना चाहिए, उसके बाद माता लक्ष्मी और कुबेर की पूजा करें। पूजा प्रारम्भ करने से पहले नए कपड़े को किसी चौकी या पाटे पर बिछा ले तथा अन्य दूसरे कपड़ें पर मुट्ठी भर अनाज रख लें। जल से भरा कलश में गंगाजल मिला लें।कलश में आम के पत्ते भी रख लें। इसके अलावा फूल, सुपारी, एक सिक्का और कुछ चावल के दाने और अनाज भी इस पर रख लें।  पूजा में फूल, फल, चावल, रोली-चंदन, धूप-दीप का उपयोग अवश्य करें। इस दिन पूजा में भोग लगाने के लिये नैवेद्य के रूप में सफेद मिठाई का प्रयोग करें। मान्यता है कि माता लक्ष्मी और कुबेर की पूजा अर्चना से घर में सुख शांति और समृद्धि हमेशा के लिए बनी रहती है।
कब निकालें यम का दीपक ?
धनतेरस के दिन संध्या के समय में घर के बाहर एक दीप जलाना चाहिए। यह दीप यमराज के लिए जलाया जाता है। जैसा की हम सभी जानते हैं की यम मृत्यु के देवता हैं। यम के लिए दीपक जलाने से यमराज खुश होते हैं और परिवार के सदस्यों की अकाल मृत्यु से रक्षा करते हैं।
धनतेरस से संबंधित कथा
धनतेरस को लेकर अनेक कथा प्रचलित है। इसमें एक कथा के अनुसार त्रेतायुग में इसी दिन भगवान विष्णु ने असुरों के गुरु शुक्राचार्य की आंख फोड़ दी थी। देवताओं को राजा बलि के भय और बल से मुक्ति दिलाने के लिए भगवान विष्णु ने वामन अवतार लिया और राजा बलि के यज्ञ स्थल पर पहुंच गए। वामन रूप में स्थित विष्णु भगवान् ने राजा बलि तीन पग भूमि दान में मांगा ।
शुक्रचार्य ने वामन रूप में धारण किये भगवान विष्णु को पहचान लिया और राजा बलि से वरदान न देने के लिए कहा परन्तु राजा बलि ने ऐसा नहीं किया और उन्होंने तीन पग दान में दे दिया। भगवान वामन ने एक पग में संपूर्ण पृथ्वी, दूसरे पग में अंतरिक्ष और तीसरे पग के लिए बलि ने अपना सिर भगवान के चरणों में रख दिया। इसलिए इस दिन भगवान् विष्णु की पूजा करने से धन-धन्य की वर्षा होती है।
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