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Gajkesari yoga | गजकेसरी योग दीर्घायु तथा मंत्रिपद दिलाता है
Astrology, Planet / By Dr. Deepak Sharma
Gajkesari yoga | गजकेसरी योग दीर्घायु तथा मंत्रिपद दिलाता है . वैदिक ज्योतिष में योग को विशेष महत्त्व दिया गया है कोई भी योग ग्रह, भाव भावेश की युति और प्रतियुति से बनता है। अन्यान्य योग में ‘गजकेसरी योग’ का विशिष्ट स्थान है। इस योग में उत्पन्न बालक समाज और परिवार में मान, सम्मान, यश, समृद्धि इत्यादि को प्राप्त करता है। यह योग बृहस्पति (Jupiter) और चंद्रमा (Moon) की युति और प्रतियुति से बनता है। जब दोनों ग्रह एक दूसरे से केंद्र में होते है तो गजकेसरी योग बनता है।
वृहस्पति ग्रह | Jupiter 
नव ग्रहो में बृहस्पति/गुरु सबसे शुभ ग्रह है। यह ग्रह जातक को मान, सम्मान, पुत्र, ज्ञान, धर्म, उच्च पद्वी, धन दौलत, विकास और समृद्धि दिलाता है। राशि चक्र में गुरु धनु (नवम भाव, धर्म) और मीन (द्वादश भाव, मोक्ष) राशि का स्वामी है। दोनों भाव एक दूसरे से केंद्र में है। वृहस्पति को देवताओ का गुरु कहा जाता है। सभी ग्रहों में गुरु सबसे शुभ ग्रह है। यदि जन्मकुंडली में गुरु उच्च होकर या अपने घर का होकर केंद्र या त्रिकोण में बैठा है तो निश्चित ही जातक को जीवन में खुशियाँ ही खुशियाँ प्रदान करता है।
चन्द्रमा | Moon
चंद्रमा जन्मकुंडली में मन, माता, बुद्धि, भावना, दया, धन, सुख, कोमलता, आकर्षण, प्रसन्नता इत्यादि का कारक ग्रह है। राशिचक्र में वह कर्क राशि का स्वामी है। वैदिक ज्योतिष में चंद्र राशि को भी लग्न का दर्जा दिया गया है। केंद्र स्थित ग्रह लग्न पर विशेष प्रभाव डालता है। इसी कारण बृहस्पति ग्रह जब चंद्रमा से केंद्र में स्थित है तो निश्चित ही चंद्रमा और चंद्र लग्न पर अपने शुभ प्रभाव से कारकत्व को बल प्रदान करता है। इसी कारण ‘गजकेसरी योग’ का विशेष महत्त्व है।
गजकेसरी का शाब्दिक अर्थ | Meaning of Gajkesari Yoga
संस्कृत में “गज” का अर्थ हाथी तथा “केसरी” का अर्थ सिंह होता है भारतीय संस्कृत में गज और सिंह दोनों शुभता के साथ साथ शक्ति का प्रतीक है। इन्ही दोनों के संयोग से यह योग निर्मित होता है अतः यह स्पष्ट है की इस योग का कितना महत्त्व है। जिस प्रकार हाथी में अभिमान रहित अपार शक्ति स्थित होता है और सिंह में लक्ष्य के प्रति जागरूकता व अदम्य साहस तथा जंगल का राजा मैं हूं का बोध होता है उसी प्रकार जिस जातक के कुंडली में यह योग बनता है वह वैसा ही विचार तथा बुद्धि वाला होता है। वह समाज तथा परिवार में अपनी श्रेष्ठता साबित करता है।
प्राचीन ग्रन्थों में गजकेसरी योग का फल | Gajcasari yoga effect in ancient texts
भारतीय ज्योतिष साहित्य में कई स्थान पर गजकेसरी योग के सम्बन्ध में कहा गया है यथा — जातक परिजात के अनुसार —
गजकेसरी संजातस्तेजस्वी धनधान्यवान।
मेधावी गुणसंपन्नो राजप्रिय करो भवेत।।
अर्थात् जिस व्यक्ति का जन्म ‘‘गजकेसरी योग” में हुआ है वैसा जातक तेजस्वी, धनवान, बुद्धिमान, सत्कर्मी, मेधावी, सर्वगुणसम्पन्न, राजकार्य करने वाला होता है।’’
‘फलदीपिका’ ग्रंथ के अनुसार-
केसरीव रिपुवर्ग निहन्ता प्रौढ़वाक् सदसि राजसवृत्तिः।
दीर्घजीव्यतियशाः पटुर्बुद्धिस्तेजसा जयति केसरियोगे।।
अर्थात् ‘‘गजकेसरी योग” में उत्पन्न व्यक्ति शेर की तरह शत्रुओं को नष्ट करने वाला, सब का दिल जीतने वाला, कुशल वक्ता, जिसकी वाणी में दम्भ हो, सभा में पटुता, राजसी मान-सम्मान पाने वाला, दीर्घायु, यशस्वी, चतुरबुद्धि व तेजस्वी होता है।
कैसे करें  फलादेश का निर्धारण ?
यह आवश्यक नहीं है की गजकेसरी योग में उत्पन्न सभी व्यक्ति के लिए शुभ फल ही प्रदान करने वाला हो। योग की शुभता और अशुभता का निर्धारण बृहस्पति और चंद्रमा के बल, राशि व भाव स्थिति तथा अन्य ग्रहों के प्रभाव के आधार पर निर्भर करता है।
इसी कारण सभी व्यक्तियों की जन्मकुंडली में इस योग का फल विभिन्न रूप में मिलता है। इस योग का फल इन ग्रहों की दशा भुक्ति में प्राप्त होता है। उस समय गुरु का शुभ गोचर फलादेश में वृद्धि करता है, जबकि पापी ग्रहों का अशुभ गोचर फलादेश में कमी करता है।
किस लग्न में शुभ फल देता है | Which Ascendant is Auspicious
सभी लग्नों में जब मेष, कर्क तथा वृश्चिक लग्न में गजकेसरी योग बनता है तो वह बहुत ही शुभ होता है क्योकि ये दोनों ग्रह त्रिकोण भाव का स्वामी होकर एक दूसरे से केंद्र में होते है। मीन तथा कर्क लग्न में भी यह शुभ फल प्रदान करता होता है। अन्य लग्नों में इस योग का फल सामान्य होता है। किसी भी योग के शुभ और विशेष फल प्राप्ति के लिये लग्न और लग्नेश को मजबूत होना जरुरी होता है यदि लग्न तथा लग्नेश मजबूत नही है तो विशेष फल की प्राप्ति संभव नहीं है। यह योग मंत्री पद दिलाने में सक्षम होता है।
उदाहरणस्वरूप राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर की कुंडली में यह योग देखा जा सकता है। इनकी कुंडली कर्क लग्न की है लग्नेश चन्द्रमा तथा भाग्येश वृहस्पति दोनों ग्रह धन तथ वाणी स्थान में स्थित होकर गजकेसरी योग बना रहा है। आप सभी दिनकर जी से पूर्व परचित है। विशेष जानकारी के लिए  पढ़े —-
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