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Nag Panchami Tyohar 2020 | नागपंचमी व्रत महत्त्व पूजा विधि
Astrology / By Dr. Deepak Sharma
Nag Panchami Tyohar 2020 | नागपंचमी व्रत महत्त्व पूजा विधि 2020 । भारत में नागपंचमी का त्यौहार बड़े ही धुमधाम से सावन मास के शुक्लपक्ष की पंचमी को मनाया जाता है।  वर्ष 2020 में नाग पंचमी का त्योहार 25 जुलाई, शनिवार को मनाया जायेगा।  राजस्थान तथा बंगाल में यह त्यौहार कृष्ण पक्ष के पंचमी के दिन मनाया जाता है। इस दिन नाग देवता को दुध और लावा चढ़ाने का विशेष महत्व है। विभिन्न मंदिरो में श्रद्धालुओ द्वारा भगवान शिवजी के साथ-साथ नाग देवता की पुजा अर्चना की जाती है। पौराणिक मान्यताओ के अनुसार आज के दिन नाग देवता की पुजा अर्चना करने का विशेष महत्व है।
नागपंचमी के दिन नाग देवता अथवा सर्प की पूजा की जाती है।  इसी कारण नागपंचमी कहा जाता है। भारतीय ज्योतिष शास्त्र के अनुसार पंचमी तिथि के स्वामी नाग हैं  इसी कारण इस  दिन नाग पूजा करने  का विधान है। नागपंचमी के दिन नागों की पूजा करने से लक्ष्मी रूपी धन की प्राप्ति होती है साथ ही आध्यात्मिक शक्ति का भी विकास होता है।
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क्यों है ? नाग पंचमी के दिन का विशेष महत्त्व | Importance of Nag Panchami day 
नागपंचमी (Nag Panchami) त्यौहार का विशेष महत्त्व है इसमें कोई संदेह नहीं है। इस व्रत के माध्यम से हमारे पूर्वजो ने पशु-पक्षी, वृक्ष-वनस्पति के प्रति आदर भाव तथा उनके साथ आत्मीय संबंध जोड़ने का प्रयत्न किया है। भारत में नाग पूजा के तरह ही अनेक पूजा होती है जैसे – गाय की पूजा, वृषभ पूजा,कोयल दर्शन, वट-सावित्री पूजा, केला, पीपल, तुलसी की पूजा इत्यादि की जाती है।
कई बार मन में यह प्रश्न उठता है की गाय तो हमें दूध देती है केला का पेड़ फल प्रदान करता है, तुलसी हमारे शरीर के लिए एंटीबाडी काम करती है इसलिए हम इनकी पूजा करते है परन्तु नाग वा सर्प तो काटती है और जान भी ले लेती है। इसे तो देखते ही मार देना चाहिए फिर क्यों पूजते हैं ?
प्रथमतः भारत देश कृषि प्रधान देश था, है और रहेगा। साँप भूमि के अंदर बिल बनाकर रहता है ऐसी मान्यता है की साँप हमारे खेतों का रक्षण करता है, इसलिए उत्तरी भारत में साँप को क्षेत्रपाल भी कहा जाता है। खेत में अन्य जीव-जंतु जैसे चूहे आदि जो फसल को नष्ट साँप उसको नाश करके हमारे फसल को रक्षा करता है और अंततः धन प्रदान करता है।
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जानिए शिवजी की पूजा में क्या नहीं चढ़ाना चाहिए
जैसा की सर्वविदित है साँप महादेव शिवजी को सबसे प्रिय है शिवजी ने तो नाग को अपने गले में ही धारण किए हुए है अतः स्पष्ट है कि भगवान् के द्वारा धारित तत्व का पूजा करना हमारा कर्त्तव्य बनता है। वैसे भी साँप सामान्यतया किसी को बिना किसी कारण कभी भी नहीं काटता। साँप तभी काटता है जब उसे लगता है की कोई हमें मारने वाला है।
कहा जाता है की कुछ साँपों के मस्तिष्क पर मणि होती है। मणि अमूल्य होती है। और यह मणि युक्त सर्प जिस भी स्थान में होता है उस स्थान का तथा उस स्थान में रहने वाले का चहुमुखी विकास होता है। इसी कारण सर्प मणि पाने के लिए प्राचीन काल से ही ऋषि महात्मा से लेकर साधारण मनुष्य भी प्रयत्नशील रहते है।  अब आप ही बताये हमें नाग की पूजा करनी चाहिए या नहीं मेरे अनुसार तो करनी ही चाहिए।
समुद्र मंथन में भी वासुकि नाग साधन रूप बनकर प्रभु के कार्यो में पूर्णतः सहयोग किया था। दुर्जन भी यदि भगवद् कार्य में जुड़ जाते है भगवान् उसे भी स्वीकार करते हैं, इस बात का समर्थन विष्णु भगवान ने शेष-शयन करके किया है। भगवान् श्री रामचंद्र ने भी विभीषण (शत्रु का भाई सर्पवत ही तो होता है) को स्वीकार करके दिखाया। देवो के देव शिवजी ने साँप को अपने गले में रखकर। श्रावण मास में नाग पूजा का सम्बन्ध भी महादेव के प्रिय मास सावन से जुड़ा हुआ है।
“सर्वजन हिताय सर्वजन सुखाय” के लिए बरसात जरुरी है। परन्तु बरसात में बिलो में जब पानी भर जाता है तब बिलो से निकलकर साँप हमारे घर अतिथि बनकर आता है तब उसे आश्रय देना तथा उसका पूजन करना हमारा कर्त्तव्य बन जाता है। शायद इसी कारण महादेव शिवजी ने साँप को अपने गले में आश्रय प्रदान किया होगा। इसी वजह से सावन मास में नाग पंचमी पूजा का विधान किया गया होगा।
नागपंचमी के दिन क्या करना चाहिए | What to do in Naag Panchami 
नागपंचमी पूजन विधि|How should do Nag Panchami Worship 
प्रातः उठकर घर की सफाई कर नित्य क्रिया से निवृत्त होने के बाद स्नान करे। उसके बाद साफ-स्वच्छ वस्त्र धारण करें। नाग पूजा करने के लिए स्थान निर्धारित कर ले। इसके बाद दीवाल पर गेरू से पोतकर उस स्थान को शुद्ध कर लें।  पुनः उसमें अनेक नागदेवों की आकृति बनाना चाहिए। हालांकि इस बात का जरूर ध्यान रखे की स्थान विशेष में पूजा का विधान अलग हो जाता है यहाँ पर सामान्य पूजा के विषय में चर्चा करना श्रेष्ठकर होगा।  कुछ स्थानों पर सोने, चांदी, काठ व मिट्टी की कलम तथा हल्दी व चंदन की स्याही से अथवा गोबर से घर के मुख्य दरवाजे के दोनों दिशा / तरफ पाँच फन वाले नागदेव अंकित करना चाहिए
इस दिन पूजा करते समय द्वादश नागदेवता के नाम का स्मरण करते हुए पूजा करनी चाहिए। बरष नाग देवता का निम्न प्रकार से है —
  1. अनन्त 
  2. वासुकि
  3. शेष
  4. पद्म
  5. कम्बल
  6. कर्कोटक
  7. अश्वतर
  8. धृतराष्ट्र
  9. शंखपाल
  10. कालिया
  11. तक्षक
  12. पिंगला
सबसे पहले उस स्थान की पूजा करें जहाँ नाग देवता का निवास स्थान है( इसकी खोज पूर्व में ही कर ले  वहां जाकर एक कटोरी दूध चढ़ा देना चाहिए फिर दीवाल पर बनाए गए नागदेवता की दधि, दूर्वा, कुशा, गंध, अक्षत, पुष्प, जल, कच्चा दूध, रोली और चावल आदि से पूजन कर सेंवई व मिष्ठान से उनका भोग लगाना चाहिए। उसके बाद आरती करे और पुनः कथा सुनकर अपनी पूजा समाप्त करें।
नागपंचमी पूजा मंत्र | Nag Panchami puja Mantra 
सर्वे नागाः प्रीयंतां में ये केचित पृथिवीतले।
ये च हेलिमरीचिस्था येsन्तरे दिवि संस्थिताः।।
ये नदीषु महानागा ये सरस्वतिगामिनः।
ये च वापीतडागेषु तेषु सर्वेषु नमः।।
अन्नतं वासुकिं शेषम पद्मनाभं च कम्बलं।
शंख पालं धृतराष्ट्रं तक्षकं कालियम तथा।
एतानि नाव नामानि नागानां  च महात्मनाम।।
सायंकाले पठेन्नित्यं प्रातःकाले विशेषतः।
तस्य विषभयं नास्ति सवर्त्र विजयो भवेत्।।
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2 thoughts on “Nag Panchami Tyohar 2020 | नागपंचमी व्रत महत्त्व पूजा विधि”
NAVIN
02/08/2016 AT 2:39 PM
Knowledgeable. Presentation is awesome. Deep and compendious explanation of Nagpanchmi. I liked from the inner core of my heart. Thanks for sharing so deep and meaningful info.
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DR. DEEPAK SHARMA
02/08/2016 AT 7:40 PM
Many many thanks for compliments
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